Ads Top

टेड हॉफ माइक्रोप्रोसेसर के जनक i


दोस्तों आज हम बात कर रहे हैं iमाइक्रोप्रोसेसर और उसके invention और उनके प्रमुख inventer में से एक टेड हॉफ की ,जी हाँ माइक्रोप्रोसेसर जिसकी वजह से computer और प्रोसेसर की दुनिया में क्रांति तो आई ही साथ ही साथ उससे related industries में भी गजब का revolution हुआ ।जिसकी वजह से ही आज मैं यह post अपने छोटे से फ़ोन पर लिख पा रहा हूँ ।तो चलिए  इस ज्ञानवर्धक journey में हमारे साथ ,लेकिन पहले कुछ basic बाते जैसे की ,
*   माइक्रोप्रोसेसर का पेटेंट टेड हॉफ ,माजोर और फ्रेडरिको के नाम दर्ज हैं ।

* माजोर और फ्रेडरिको को सिंगल चिप माइक्रोप्रोसेसर का inventer माना जाता हैं।
       ,तो चलिए अब आगे बढ़ते हैं ,




          बात 1968 की हैं । intel से टेड हॉफ को एक फ़ोन आया ,phone intel के co-founder रॉबर्ट नोयस का था । रॉबर्ट ने हॉफ के सामने अपनी नयी compney में काम करने का offer दिया ।उस समय हॉफ एक सरकारी प्रोजेक्ट के लिए रिसर्च कर रहे थे ।अब इस बात पर उन्होंने गंभीरता से विचार किया तो उन्हें यह लगा की नोयस के साथ काम करना एक बेहतर विकल्प है ,और इसलिए वह इस पर ख़ुशी-ख़ुशी राज़ी हो गए ।  वह intel के 12th employe बने और यहाँ उनके invention ने computer और Intel की history को change कर के रख दिया ।
   
            यह सब उनके compney join करने के एक साल बाद हुआ ।जब 1969 में जापानी calculater manufacturer compney बुसीकॉम्प ने इंटेल को प्रोग्रामेबल calculaters के लिए चिप डिज़ाइन करने को कहा । यह काम टेड को दिया गया था ।हॉफ को जापानी कंपनी का डिज़ाइन पसंद नही आया था क्यों की उसमे 12 चिप थी ,उन्हें लगा की इतने चिप डिज़ाइन करने से तो ये बड़ा जटिल हो जायेगा और खर्च बढ़ेगा सो अलग । हॉफ ने इसके जगह पर चार चिप का सेट तैयार किया ।इंटेल के एक और डिज़ाइनर स्टेनली माजोर ने इस डिज़ाइन को perfect बनाया । बुसीकॉम्प ने यह डिज़ाइन accept कर लिया ।इसके बाद चिप डिज़ाइनर एक्सपर्ट फ्रेडरीको फाज़िन ने हॉफ के इस डिसीजन को सिलिकॉन में ट्रांसफर कर दिया । ये डिज़ाइन बुसकॉम्प को देने के बाद इंटेल को इसके संभावित बाजार का एहसास हुआ ।कंपनी ने बुसीकॉम्प से बात की और इस चिप के अधिकार हासिल कर लिए ।
1971 में इंटेल 4004 को जरी किया ,ये थी मिक्रोप्रोग्रामेबल कंप्यूटर चिप । ये चिप अपने आप में पूरा कंप्यूटर थी ।इसमें एक छोटी सी जगह पर कंप्यूटर और सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के सभी फंक्शन थे ।इसमें 2300 से ज्यादा ट्रांसमीटर थे ।माइक्रोप्रोसेसर के इसी  invention ने कंप्यूटर को छोटा बना दिया ।इसी के बल पर 1970 से लेकर 1990 के दौर में pc industry ने जोर पकड़ा । इसी का नतीजा है की आज बेहद ताक़तवर smartphones हमारी जेबो में हैं ।




         टेड हॉफ  का जन्म 28 अक्टूबर 1937 को न्यूयॉर्क के रोचेस्टर में हुआ था । इनका पूरा नाम marcian Edward "Tedd" hoff  jr. हैं ।  उन्होंने electonic engineering में अंडर ग्रेदुएट की डिग्री लेने के बाद स्टेनफोर्ड से मास्टर्स की डिग्री हासिल की ।इसके बाद स्टेनफोर्ड से ही उन्होंने Phd की और बतौर रिसर्चर काम किया ।वह इतने प्रतिभाशाली थे की ग्रेदुअतिओं के दौरान ही उन्होंने दो पेटेंट हासिल कर लिए थे । बचपन में हॉफ को chemistry पसंद थी (हां पर मुझे इस subject से नफरत हैं ) । जब वे नौ साल के थे तो माता-पिता ने केमिस्ट्री का सेट गिफ्ट किया था ।उनके चाचा जो खुद केमिकल इंजीनियर थे ,उन्हें केमिस्ट्री की किताबे दिया करते थे । उनके चाचा ने उन्हें क्रिसमस पर पॉपुलर साइंस मैगजीन का सब्सक्रिप्शन गिफ्ट किया था । इसमें उन्होंने एक विज्ञापन देखा जो फ्री रेडियो कैटलॉग के बारे में था ,उनकी दिलचस्पी पैदा हुई  की रेडियो कैसे काम करता है । जिज्ञासा बढ़ती गयी तो फिर घर वालो ने उन्हें रेडियो उपहार दे दिया ।स्कूल के दिनों में वो केमिस्ट्री और इलेक्ट्रॉनिक्स दोनों पढ़ने लगे थे ।फिर जब कॉलेज में केमिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में चुनने की बारी आई तो उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स को चुना ।अपने invention के बारे में हॉफ ने एक interview में कहा था की सभी लोग मूल रूप से क्रिएटिव ही होते हैं ।लेकिन कुछ लोगो को ऐसा माहौल मिलता हैं की खुद पर उनका भरोषा कम होता जाता हैं ,वो आत्मविश्वास पैदा नही कर पाते ।जबकि कुछ को अवसर मिलता हैं की उनकी बनाई चीज़ों को सराहा जाता हैं। शायद उन्होंने सच ही कहा हैं की क्रिएटिव तो हम सब हैं ,दिमाग हम सब के पास हैं ,बस जरुरत हैं तो सिर्फ अवसर और आत्मविश्वास की फिर हमें कामयाबी की सीढ़ियों पर चढ़ने से कोई नही रोक पायेगा ।
             * * * * * * * * * * * * *
अगर आपको यह post लाभकारी और ज्ञानवर्धक लगी हो तो share और comment जरूर करे ।
              धन्यवाद...............
 

No comments:

Powered by Blogger.